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founded by S. N. Goenka in the tradition of Sayagyi U Ba Khin

 

 

 

 

 

Kendriy Karagrih Jaipur

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केंद्रीय कारागृह जयपुर, विपस्सना का प्रथम जेल शिबिर
इसमें " जेलों में विपश्यना" का ऐतिहासिक पर्यवेक्षण, जेल शिबिर के बारे में शोध कार्य, शिबिर में भाग लेने वाले बंदियों में से आरोप में बंद २४ बंदियों के अनुभव, बुद्धवाणी के सन्धर्भा में शिविरार्थियों के अनुभवों की समीक्षा मृत्युदंड प्राप्त कैदी विपश्यना के प्रभाव से प्रसन्न मुद्रा से फांसी के तकते पर चढ़ा, बुद्ध द्वारा अनुदेशित ३८ मंगल-धरम, शिबिर काल के चित्र इसमें प्रस्तुत है।

SKU:
H29
ISBN No: 
81-7414-259-2
Publ. Year: 
2005
Author: 
Vipassana Research Institute
Language: 
Hindi
Book Type: 
Paperback
Pages: 
88
Preview: 
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