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Upali * उपालि: विनयधरों में अग्र (PDF Book, Hindi)

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उपालि- (PDF Book, Hindi)
बुद्ध के अग्रश्रावकों की शृंखला में विपश्यना विशोधन विन्यास द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक का उद्देश्य पुराने विपश्यी साधकों को गंभीरतापूर्वक विपश्यना ध्यान का अभ्यास करने की तथा नये साधकों को इस पथ पर चलने की प्रेरणा देती है।
नापित परिवार में जनमे उपालि बुद्ध के अग्रश्रावकों में एक थे। संयोगवश बुद्ध के साथ उनकी भेंट से उनका जीवन सदा के लिए बदल चुका और वे एक भिक्षु के रूप में प्रव्रजित किये गये। विनय में भिक्षुओं के लिए बुद्ध द्वारा बनाये गये नियमों को पालन करने में वे अग्र थे। बुद्ध के महापरिनिर्वाण के तीन महीने बाद जो ऐतिहासिक धम्मसंगीति हुई उसमें उपालि की भूमिका असाधारण थी।
इस पुस्तक में उपालि का जीवन-चरित, उनके गुण, भगवान बुद्ध द्वारा दिये गये भिक्षुओं के लिए विनय-नियम, धर्मोपदेश और संघ में भेद नहीं— इन सब बातों का वर्णन है। सबसे महत्त्वपूर्ण बात इस पुस्तक में यह हैं कि भिक्षुसंघ की जाति नहीं देखी जाती थी। साथ ही यह भी रेखांकित है कि बुद्ध की शिक्षा असांप्रदायिक है।
विपश्यी साधकों तथा जो साधक नहीं भी हैं उनके लिए यह पुस्तक एक आदर्श पुस्तक है।

SKU:
H92-pf
ISBN No: 
978-81-7414-392-1
Publ. Year: 
2017
Author: 
Vipassana Research Institute
Language: 
Hindi
Book Type: 
PDF
Pages: 
40
Preview: 
PDF icon Preview (5.31 MB)