Dhamma Patravali - धम्म पत्रावली (Hindi Paperback book)
Dhamma Patravali - धम्म पत्रावली
Hindi Paperback book, Code no. H117
“धम्म की गंगा संसार में बहती रहे, सबके सुख और कल्याण के लिए।”
विपश्यनाचार्य श्री सत्यनारायण गोयन्का के श्रद्धा, संघर्ष और धम्म-साधना से भरे पत्रों का एक दुर्लभ संकलन है।
इसमें श्री एस.एन. गोयन्का, उनके आदरणीय आचार्य सयाजी ऊ बा खिन, माता जी (श्रीमती इलायचीदेवी गोयन्का), परिजनों और विद्यार्थियों के बीच हुआ पत्र-व्यवहार संकलित है। इन पत्रों के माध्यम से भारत में विपश्यना के पुनरुद्धार के प्रारम्भिक वर्षों की झलक मिलती है- साथ ही यह भी स्पष्ट होता है कि गहन धम्म-भाव से जीवन की कठिनाइयों का सामना कैसे किया जा सकता है।
इन पत्रों में गोयन्काजी राष्ट्रीयकरण, आर्थिक हानि, पारिवारिक ज़िम्मेदारियों और सामाजिक दबावों के बीच समता, जागरूकता और धम्म-विश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
वे बताते हैं कि लाभ-हानि, यश-अपयश, भय-असुरक्षा और अनिश्चितता की स्थितियों में भी मन को घृणा और शोक से कैसे मुक्त रखा जाए, और संकटों को साधना व सेवा के अवसर में कैसे बदला जाए।
सयाजी ऊ बा खिन के साथ पत्र-व्यवहार से यह भी ज्ञात होता है कि बुद्धभूमि भारत में, लगभग दो सहस्राब्दियों के बाद, विपश्यना को फिर से स्थापित करने का ऐतिहासिक प्रयास कितना सूक्ष्म, दृढ़ और शुद्धता पर आधारित था- बिना किसी व्यावसायिकता के, केवल कल्याण-मंगल की भावना से।
पुस्तक के उत्तरार्ध में माता जी और गोयन्काजी के भावपूर्ण पत्र, संक्षिप्त जीवन परिचय, श्री गोयन्का द्वारा संचालित पाठ्यक्रमों की सूची तथा पालि, हिन्दी और बर्मी शब्दों की संक्षिप्त शब्दावली भी दी गई है।
विपश्यना साधकों और गंभीर आध्यात्मिक खोजियों के लिए धम्म पत्रावली केवल एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि एक जीवंत मार्गदर्शक है— जो दिखाता है कि बुद्ध का मार्ग व्यापार, परिवार और सामाजिक परिवर्तन के बीच रहते हुए भी, क्षण-क्षण में, प्रज्ञा, करुणा और साहस के साथ जिया जा सकता है।





