Thergatha-Atthakatha Bhag 1 थेरगाथा-अट्ठकथा भाग 1 (Paperback book)
थेरगाथा-अट्ठकथा भाग -1 (Paperback book)
code no - H118
थेरगाथा अट्ठकथा का यह प्रामाणिक हिंदी अनुवाद 1600 साल में पहली बार किया गया है जो विपश्यना विशोधन विन्यास से प्रकाशित किया गया है।
‘थेरगाथा’ खुद्दकनिकाय के अंतर्गत एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण ग्रंथ है। थेरगाथा अट्ठकथा भाग-1 में तीन निपातों की अर्थकथा (अट्ठकथा) है। एककनिपात में 120 थेरों द्वारा उदान स्वरूप जो एक-एक गाथा कही गई है उनकी अट्ठकथा है अर्थात उन गाथाओं के अर्थ दिये हैं।
द्विक निपात में 49 थेरों की 98 गाथाएं हैं जिनकी अट्ठकथा (अर्थ-कथाएं) यहां दी गई हैं और त्रिक निपात में 16 थेरों की 48 गाथाओं की अर्थ कथाएं हैं। इस तरह थेरगाथा भाग-1 में 185 थेरों की अट्ठकथा या अर्थवर्णना की गई है।
अट्ठकथा संस्कृत की टीका की तरह नहीं है। इसमें शब्दों के सिर्फ अर्थ ही नहीं दिये गये है बल्कि और भी बहुत सारी बातें हैं जिनसे उस समय के भारत की संस्कृति पर प्रकाश पड़ता है। अट्ठकथा के बारे में जानने के लिए इस पुस्तक की भूमिका पढ़ें।
इस अनुवाद को पढ़कर पाठक बुद्ध की शिक्षा की गहराई को समझ सकेंगे।
विपश्यी साधकों तथा जो साधक नहीं भी हैं, उनके लिए यह पुस्तक अवश्य पठनीय है।



