Khema Evam Uppalavanna * खेमा एवं उप्पलवण्णा (Hindi)
खेमा एवं उप्पलवण्णा
बुद्ध के अग्रश्रावकों की शृंखला में विपश्यना विशोधन विन्यास द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक का उद्देश्य पुराने विपश्यी साधकों को गंभीरतापूर्वक विपश्यना ध्यान का अभ्यास करने की तथा नये साधकों को इस पथ पर चलने की प्रेरणा देती है।
खेमा राजा बिंबिसार की रानी थी। वह बहुत सुंदर थी और उसे अपने सौंदर्य का घमंड था। बुद्ध ने एक तरुण स्त्री को कई अवस्थाओं में दिखाकर शारीरिक सौंदर्य की क्षणभंगुरता उसे दिखाई। इस शरीर को क्षणभंगुरता का अनुभव कर खेमा ने संसार का त्याग किया और निर्वाण की प्राप्ति की। अपनी प्रखर प्रज्ञा से उसने बहुत से लोगों को विपश्यना तकनीक समझने में सहायता की और अपना पूरा जीवन धम्म के प्रचार-प्रसार में लगी रही।
उप्पलवण्णा श्रावस्ती के एक धनी श्रेष्ठी की पुत्री थी और अपने अप्रतिम सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध थी। जब वह विवाह योग्य हुई तो उसका हाथ मांगने के लिए अर्थात उससे विवाह करने के लिए बहुत शक्तिशाली तथा धनी लोग आये। उनका हाथ मांगने वालों में झगड़ा न हो, इसलिए वह भिक्षुणी बन गयी और उन्होंने निर्वाण की प्राप्ति की। शेष जीवन उन्होंने लोगों की सेवा करने में बिताया और उन्हें विपश्यना साधना करने में लगाया। वह ऋद्धिमतियों में सबसे अग्र थी।
इस पुस्तक में बुद्ध की इन दो शिष्याओं की कहानियां हैं तथा विपश्यना के प्रचार-प्रसार में उनके अवदान का वर्णन है।
विपश्यी साधकों तथा जो साधक नहीं भी हैं उनके लिए यह एक आदर्श पुस्तक है।











